गांधी मंडेला पुरस्कार- सर्वकालिक विश्व अग्रदूतों की याद में एक पहल


गांधी मंडेला पुरस्कार का उद्देश्य उन लोगों को सम्मानित करना है जो इन दो महापुरुषों के विचारों और आदर्शों से प्रेरित हुए हैं।

गांधी मंडेला पुरस्कार- सर्वकालिक विश्व अग्रदूतों की याद में एक पहल


महात्मा गांधी और नेल्सन मंडेला के विचारों के लिए प्रतिबद्ध नई दिल्ली स्थित गांधी मंडेला फाउंडेशन ने भारत के पहले अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार, गांधी मंडेला पुरस्कार का गठन किया है। महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती पर पुरस्कार की घोषणा करते हुए फाउंडेशन ने कहा कि ये पुरस्कार राज्य और सरकार के प्रमुखों और दुनिया भर के अन्य प्रतिष्ठित व्यक्तियों / संगठनों के अनुकरणीय कार्यों और उपलब्धियों का सम्मान करता है।  

 

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

गांधी मंडेला अवार्ड (परिचय और उद्देश्य) :- ‘गांधी मंडेला अवार्ड’ भारत से स्थापित दुनिया का एक ऐसा सर्वाधिक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार है जो विश्वभर के विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों और विशिष्ट व्यक्तियों द्वारा किए गए उनके अति विशिष्ट कार्यों, उपलब्धियों और योगदानों को सम्मानित करने का एक अतुलनीय मंच भी है। पिछली दो शताब्दियों के इन दो युग पुरूषों के नाम पर स्थापित इस अंतरराष्ट्रीय अवॉर्ड के आयोजक ‘गांधी मंडेला फ़ाउंडेशन’ का मानना हैं कि जिस महात्मा गांधी को तीन बार नोबेल पुरस्कार के लिए नामांकन के बाद भी पुरस्कार के योग्य नहीं समझा गया उसी महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर शुरू होनेवाला यह पुरस्कार दुनिया को एक नई दशा और दिशा प्रदान करेगा, इसे पाने वालो में इनके आदर्शों की सच्ची झलक मिलेगी। यह पुरस्कार शान्ति, सत्य -अहिंसा, समाज कल्याण, कला-साहित्य, पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में अति विशिष्ट योगदान करनेवाली महान हस्तियों को प्रदान किया जाएगा। पुरस्कार के लिए उम्मीदवारों का चयन एक अतिविशिष्ट समिति करेगी जिसमें भारत, नेपाल और बांग्लादेश सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश और मानवाधिकार आयोग पूर्व अध्यक्ष शामिल होंगे। यह दक्षिण-मध्य एशिया के तीन राष्ट्रों के मुख्य न्यायाधीशों श्री दीपक मिश्रा, भारत, श्री के. जी. बालाकृष्णन, भारत, श्री केदार नाथ उपाध्याय, नेपाल और एम.डी. तफ़ज़्ज़ुल इस्लाम, बांग्लादेश की एक अतुलनीय, सर्वमान्य और सक्षम चयन समिति होगी जो गांधी-मंडेला पुरस्कार की महत्ता को प्रमाणित करती है। इसके पहले ही आयोजन में कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों सहित 30 देशों के प्रतिनिधियों के नामांकनों का सम्मिलित होना इसके अंतरराष्ट्रीय स्वरुप और अहमियत को दर्शाता है। प्रति वर्ष इस पुरस्कार का आयोजन दुनिया के विभिन्न देशों में किया जाएगा। 2019 में नई दिल्ली से प्रारम्भ होने के बाद अब 2020 में इसका अगला आयोजन लंदन में होगा जिसमें ब्रिटिश की महारानी एलिज़ाबेथ के भी सम्मिलित होने की सम्भावना है। https://panchayatitimes.com/newsdetail.php?id=1035

A post shared by Gandhi Mandela Award (@gandhimandelaaward19) on Oct 2, 2019 at 3:49am PDT

 

गांधी मंडेला फाउंडेशन का मानना है कि महात्मा गांधी और नेल्सन मंडेला के आदर्श आज की दुनिया में भी प्रासंगिक हैं जितने कि वे उनके जीवनकाल में थे। जैसा कि फाउंडेशन ने कहा “महात्मा गांधी को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए पांच बार नामांकित किया गया था लेकिन उन्हें कभी भी प्रदान नहीं किया गया इसलिए उनकी 150 वीं जयंती पर उनके और नेल्सन मंडेला, जिन्होंने अहिंसा, बहुलवाद और पूर्वाग्रह के आदर्शों को अपनाया, के नाम पर शुरू किया जाने वाला ये पुरस्कार उनके लिए एक श्रद्धांजलि होगी। इस पुरस्कार का  उद्देश्य उन लोगों को सम्मानित करना है जो इन दो महापुरुषों के विचारों और आदर्शों से प्रेरित हुए हैं। यह दुनिया भर में व्यक्तिगत स्वतंत्रता, नागरिक स्वतंत्रता और मानव अधिकारों को बढ़ावा देने के लिए एक लंबा सफ़र तय करेगा”

ये पुरस्कार उन हस्तियों को दिए जाएंगे, जिन्होंने शांति, समाज कल्याण, संस्कृति, पर्यावरण, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, खेल और नवपरिवर्तन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

पुरस्कार विजेताओं का चयन प्रख्यात हस्तियों की एक जूरी द्वारा किया जाएगा, जिसमें भारत, नेपाल और बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के पूर्व अध्यक्ष जिनमें भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति के.जी. बालाकृष्णन और न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, नेपाल के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति केदार नाथ उपाध्याय, बांग्लादेश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एम डी तफज्जुल इस्लाम, अंतर्राष्ट्रीय योग गुरु और पतंजलि योगपीठ के संस्थापक बाबा रामदेव के साथ भारत के सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश ज्ञान सुधा मिश्रा शामिल हैं।

 

We welcome 🇧🇩 Justice #MdTafazzulIslam
(Former Chief Justice of Bangladesh), #KedarNathUpadhiyay ji (former Chief Justice of Nepal 🇳🇵) & #BabaRamdev ji for joining as jury member for #GandhiMandelaAward 2019 pic.twitter.com/uyQBCy2v7k

— Gandhi Mandela Award (@gmaawards1) September 27, 2019

 

गांधी मंडेला फाउंडेशन के महासचिव श्री नंदन झा ने कहा, "हम यह घोषणा करने में गर्व महसूस करते हैं कि फाउंडेशन को एशिया और अफ्रीका के 30 से अधिक देशों से नामांकन प्राप्त हुए हैं, जिसमें कई राष्ट्रों के प्रमुख भी शामिल हैं"

यह पुरस्कार दुनिया के विभिन्न देशों में आयोजित किए जाएंगे, जिसकी शुरुआत भारत में नवंबर 2019 के अंत में होगी। भारत के माननीय राष्ट्रपति व भारत के उपराष्ट्रपति इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे I

गांधी मंडेला पुरस्कार के प्रथम संस्करण के कुछ प्रतिष्ठित नामांकन में नेपाल के प्रधानमंत्री श्री खड्ग प्रसाद शर्मा ओली, जाम्बिया के प्रथम राष्ट्रपति और राष्ट्रपिता श्री केनेथ डीबी कौंडा, बांग्लादेश के प्रथम राष्ट्रपति और राष्ट्रपिता स्वर्गीय शेख मुजीबुर रहमान, श्रीलंका के प्रथम राष्ट्रपति और राष्ट्रपिता डॉन स्टीफन सेनानायके, भारत के पूर्व उप प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी, संयुक्त अरब अमीरात सरकार, द रिपब्लिक ऑफ बुरुंडी की प्रथम महिला डेनिस बुकुमी नर्कुनजिजा, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य के राष्ट्रपति श्री फेलिक्स त्सेसीकी, टोगो के प्रधानमंत्री कोमी सेलोम क्लासौ, कांगो गणराज्य के राजदूत श्री आंद्रे पोह, भारत में अफगानिस्तान के राजदूत श्री मोहम्मद नईम ताहेर कादरी, किंगडम ऑफ़ मोरक्को से ओसीपी फ़ाउंडेशन, भारतीय दर्शनार्थी राजश्री बिड़ला और अजीम प्रेमजी, अध्यक्ष एमेरिटस - टाटा संस के रतन टाटा, भारतीय अभिनेता, फिल्म निर्माता और सामाजिक कार्यकर्ता आमिर ख़ान, महान पार्श्व गायिका लता मंगेशकर, वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियन मैरी कॉम, बांग्लादेशी क्रिकेटर शाकिब अल हसन, सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे और अंतर्राष्ट्रीय सदगुरु जग्गी वासुदेव शामिल हैं I

गांधी मंडेला फाउंडेशन की अगली योजना 2 अक्टूबर 2020 को लंदन में गांधी मंडेला पुरस्कार के दूसरे संस्करण को आयोजित करने की है I

Recent Posts

Categories