अवैध वीओआईपी एक्सचेंज का उपयोग कर रहे जासूसी नेटवर्क का भंडाफोड़, मुंबई से एक गिरफ्तार


रिपोर्टों के अनुसार, जब भारत और चीन के बीच तनाव इस महीने बढ़ गया तो रक्षा अधिकारियों ने बताया कि उन्हें संदिग्ध नंबरों से फोन आए थे, जहां एक भारतीय खुफिया अधिकारी के रूप में फोन करने वाला लद्दाख और अन्य महत्वपूर्ण रक्षा प्रतिष्ठानों से संबंधित जानकारी मांग रहा था।

 अवैध वीओआईपी एक्सचेंज का उपयोग कर रहे जासूसी नेटवर्क का भंडाफोड़, मुंबई से एक गिरफ्तार


एक संयुक्त ऑपरेशन में, सैन्य खुफिया और मुंबई क्राइम ब्रांच ने चेंबूर क्षेत्र में एक टेलीफोन एक्सचेंज रैकेट का भंडाफोड़ किया है। इस रैकेट के जरिए जम्मू और कश्मीर में रक्षा और सैन्य कर्मियों की गतिवधियों से संबंधित संवेदनशील जानकारी को स्थानांतरित करने के लिए कॉल किए गए थे।

स्पाई नेटवर्क अवैध वॉइस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (वीओआईपी) एक्सचेंज का उपयोग करते हुए लद्दाख में भारतीय रक्षा के बारे में जानकारी इकट्ठा करने का प्रयास कर रहे थे।

ऑपरेशन में, एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और नेटवर्क और अन्य समान एक्सचेंजों के स्थानों में शामिल अन्य व्यक्तियों की पहचान का पता लगाने के लिए एक जांच भी चल रही है और आईएएनएस के अनुसार, अगले कुछ दिनों में और गिरफ्तारियां होने की संभावना है।

संयुक्त ऑपरेशन के दौरान, 191 सिम कार्ड, लैपटॉप मॉडेम के साथ तीन कार्यात्मक चीनी सिम बॉक्स और एक स्टैंडबाय सिम बॉक्स; एंटेना; बैटरी और कनेक्टर बरामद किए गए।

यह एक्सचेंज पाकिस्तान से आने वाली अंतर्राष्ट्रीय वॉयस कॉल को स्थानीय सेलुलर कॉल्स प्रदाताओं के जीएसएम सिम कार्ड के साथ लगे चीनी सिम बॉक्स का उपयोग करके स्थानीय जीएसएम कॉल में परिवर्तित करते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, इन सिम बॉक्सों में डायनामिक IMEI सिस्टम का भी इस्तेमाल किया गया, जिससे इन्हें ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है।

वॉइस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल एक ऐसी तकनीक है जो इंटरनेट प्रोटोकॉल (आईपी) नेटवर्क पर वॉयस कम्युनिकेशंस और मल्टीमीडिया सेशन की डिलीवरी की सुविधा देती है, जैसे कि नियमित फोन लाइन के बजाय ब्रॉडबैंड इंटरनेट।

रिपोर्टों के अनुसार, जब भारत और चीन के बीच तनाव इस महीने बढ़ गया तो रक्षा अधिकारियों ने बताया कि उन्हें संदिग्ध नंबरों से फोन आए थे, जहां एक भारतीय खुफिया अधिकारी के रूप में फोन करने वाला लद्दाख और अन्य महत्वपूर्ण रक्षा प्रतिष्ठानों से संबंधित जानकारी मांग रहा था।

जांच एजेंसियां ​​पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) की भूमिका पर संदेह कर रही हैं और यह पाया गया है कि पाकिस्तान से आने वाली कॉल को स्थानीय नंबरों पर रूट किया गया था और इसका इस्तेमाल रक्षा व्यक्तियों की जानकारी निकालने के लिए किया गया था।

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