आयुष मंत्री श्रीपद नाईक का बयान, बिना अनुमति के नहीं बिक सकेगी पतंजलि की कोरोनिल


योग गुरु रामदेव बाबा ने इस बात की घोषणा की थी कि पतंजलि आयुर्वेद ने कोरोना की वैकसीन ढ़ूढ ली है, उन्होंने घोषणा की थी कि, " कोरोनिल एंड स्वैरी", एक कोरोना किट में आती है जिसकी कीमत 545 रुपये है और ये दवा कोरोना को ठीक करने में मदद कर रही है।

आयुष मंत्री श्रीपद नाईक का बयान, बिना अनुमति के नहीं बिक सकेगी पतंजलि की कोरोनिल


साल 2020 का सबसे बड़ा विलेन है कोरोना वायरस, इस विलेन ने देश-विदेश में हर किसी की नाक में दम कर रखा है और हर कोई कोरोना के कहर के बीच रहने को मजबूर हो गया है। सभी देश कोरोना का क्योर ढूंढ़ने में लगे हुए हैं, पर सफलता अभी तक किसी के हाथ नहीं लगी है। 
योग गुरु रामदेव बाबा ने इस बात की घोषणा की थी कि पतंजलि आयुर्वेद ने कोरोना की वैकसीन ढ़ूढ ली है, उन्होंने घोषणा की थी कि, " कोरोनिल एंड स्वैरी", एक कोरोना किट में आती है जिसकी कीमत 545 रुपये है और ये दवा कोरोना को ठीक करने में मदद कर रही है।

सरकार ने रामदेव की पतंजलि आयुर्वेद द्वारा "कोरोनवायरस वायरस" की वैकसीन के तौर पर लॉन्च की गई दवाओं के प्रचार-प्रसार को रोकने की बात की है। सरकार ने कहा है कि जब तक दवाओं की जांच नहीं हो जाती है तब तक उन्हें इन दवाओं के प्रचार को रोकना होगा। केंद्रीय मंत्री श्रीपद नाइक ने कहा कि यह एक अच्छी बात है कि योग शिक्षक ने देश को एक नई दवा दी है, लेकिन इसके लिए पहले जरूरत है इन दवाओं को आयुष मंत्रालय से उचित अनुमति मिलना। पतंजलि ने इस बात की पुष्टि की है कि, दवाओं से संबंधित सभी दस्तावेजों को कल ही मंत्रालय को भेज दिए गए थे।

It's a good thing that Baba Ramdev has given a new medicine to the country but as per rule,it has to come to AYUSH Ministry first.They even said that they have sent a report. We'll look into it&permission will be given after seeing the report: Shripad Naik,AYUSH Minister #COVID19 pic.twitter.com/SYJH5RroAt

— ANI (@ANI) June 24, 2020

केंद्रीय मंत्री श्रीपद नाइक ने कहा कि "कोई भी दवाई बना सकता है। जो भी दवा बनाना चाहता है, उसे आयुष मंत्रालय के टास्क फोर्स से गुजरना पड़ता है। सभी को पुष्टि के लिए आयुष मंत्रालय को रिपोर्ट भेजनी पड़ेगी। यह नियम है और कोई भी इसके बिना अपने उत्पादों का विज्ञापन नहीं कर सकता है।"  कल पतंजलि द्वारा लॉन्च की गई क्योर किट के कुछ घंटों के बाद, मंत्रालय ने तथाकथित कोरोनावायरस इलाज किट और इसके परीक्षण के लिए किए गए परीक्षणों का विवरण मांगा।

आयुष मंत्रालय ने पतंजलि को दवाओं की संरचना, इसके अनुसंधान के परिणाम, उन अस्पतालों के बारे में जानकारी प्रदान करने के लिए कहा, जहां अनुसंधान आयोजित किए गए थे, क्या कंपनी को संस्थागत आचार समिति से मंजूरी मिली थी और क्या यह नैदानिक परीक्षणों के लिए पंजीकृत था।
जहां एक तरफ कई देश और वैज्ञानिक COVID-19 की वैकसीन बनाने की जद्दोजहद में लगे हुए हैं, तो वहीं अभीतक इस  घातक वायरस की कोई भी वैकसीन नहीं मिल पाई है, जिसके जरिए इस वायरस का खात्मा किया जा सके।

बाबा रामदेव ने इस बात का दावा किया है कि पतंजलि की दवाओं ने दिल्ली, अहमदाबाद और अन्य शहरों में 280 रोगियों पर नैदानिक परीक्षणों में "100 प्रतिशत अनुकूल परिणाम" दिखाए हैं। पतंजलि ने निजी स्वामित्व वाली नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज या एनआईएमएस विश्वविद्यालय, जयपुर के साथ सहयोग किया।

 

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