बीजेपी के दिग्गज नेता जसवंत सिंह का निधन, 82 साल की उम्र में ली अंतिम सांस


जसवंत सिंह को एक समय ऐसी स्थिति का भी सामना करना पड़ा, जब अगस्त 2009 में उन्हें अपनी पुस्तक ‘जिन्नाः भारत विभाजन और स्वतंत्रता’ में पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की प्रशंसा करने पर भाजपा से निष्कासित कर दिया गया था।

बीजेपी के दिग्गज नेता जसवंत सिंह का निधन, 82 साल की उम्र में ली अंतिम सांस


जाने माने पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के दिग्गज नेता जसवंत का सिंह का 82 साल की उम्र में निधन हो गया है। उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुख वक्त किया है और साथ ही ट्वीट भी किया।  

बता दें कि, जसवंत सिंह 1960 में सेना में मेजर के पद से इस्तीफा देकर राजनीतिक के मैदान में उतरे थे। अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली राजग सरकार में वह अपने कैरियर के शीर्ष पर थे। 1998 से 2004 तक राजग के शासनकाल में जसवंत ने वित्त, रक्षा और विदेश मंत्रालयों का नेतृत्व किया। 

वहीं, जसवंत का राजनीतिक कैरियर कई उतार-चढ़ाव से गुजरा और इस दौरान विवादों से उनका चोली दामन का साथ रहा। 1999 में एयर इंडिया के अपहृत विमान के यात्रियों को छुड़ाने के लिए आंतकवादियों के साथ कंधार जाने के मामले में उनकी काफी आलोचना हुई थी।  राजग शासन के दौरान जसवंत सिंह हमेशा अटल बिहारी वाजपेयी के विश्वासपात्र के करीबी रहे, वह ब्रजेश मिश्र और प्रमोद महाजन के साथ वाजपेयी की टीम के अहम सदस्य थे।

प्रधानमंत्री मोदी ने एक दूसरे ट्वीट में लिखा, ''जसवंत सिंह जी को राजनीति और समाज के मामलों पर उनके अनूठे दृष्टिकोण के लिए याद किया जाएगा, उन्होंने भाजपा को मजबूत बनाने में भी योगदान दिया।  मैं हमेशा उनके साथ हमारी बातचीत को याद रखूंगा, उनके परिवार और समर्थकों के प्रति संवेदना. ओम शांति.''

Jaswant Singh Ji served our nation diligently, first as a soldier and later during his long association with politics. During Atal Ji’s Government, he handled crucial portfolios and left a strong mark in the worlds of finance, defence and external affairs. Saddened by his demise.

— Narendra Modi (@narendramodi) September 27, 2020

Jaswant Singh Ji will be remembered for his unique perspective on matters of politics and society. He also contributed to the strengthening of the BJP. I will always remember our interactions. Condolences to his family and supporters. Om Shanti.

— Narendra Modi (@narendramodi) September 27, 2020

बाद में वह 2009 तक राज्य सभा में विपक्ष के नेता रहे और गोरखालैण्ड के लिए संघर्ष करने वाले स्थानीय दलों की पेशकश पर दार्जिलिंग से चुनाव लड़े और जीत दर्ज की। जसवंत सिंह को एक समय ऐसी स्थिति का भी सामना करना पड़ा, जब अगस्त 2009 में उन्हें अपनी पुस्तक ‘जिन्नाः भारत विभाजन और स्वतंत्रता’ में पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की प्रशंसा करने पर भाजपा से निष्कासित कर दिया गया था। 

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