श्रावण में गंगा जल के अभिषेक से प्रसन्न होते हैं शिव


भगवान परशुराम ने अपने आराध्य देव शिव के नियमित पूजन के लिए कांवड़ में गंगाजल भरकर महादेव की पूजा-अर्चना की थी..

श्रावण में गंगा जल के अभिषेक से प्रसन्न होते हैं शिव


 

सावन का महीना भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना होता है। सावन के महीने में शिव भक्त भोले भंडारी की भक्ति में डूबे रहते हैं। ऐसा कहा जाता है कि सावन के महिने में भगवान भोले नाथ की पूजा-अर्चना से भगवान आशुतोष अभयदान देते है। हर साल श्रावण मास में लाखों की तादाद में कांवडिये दूर-दराज के क्षेत्रों से गंगा जल से भरी कांवड़ लेकर पदयात्रा करके अपने गांव वापस लौटते हैं इस पदयात्रा को ही कांवड़ यात्रा कहा जाता है। श्रावण मास की चतुर्दशी को भक्त अपने आस-पास के मंदिरों में गंगा जल से अपने निवास के आसपास शिव मंदिरों में शिव का अभिषेक करते है।

हर साल श्रावण मास में लाखों की तादाद में कांवडिये गंगा जल से भरी कांवड़ लेकर पदयात्रा करते है और अपने घर वापस लौटते हैं। श्रावण की चतुर्दशी के दिन उस गंगा जल से अपने निवास के आसपास शिव मंदिरों में शिव का अभिषेक किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि भगवान परशुराम ने अपने आराध्य देव शिव के नियमित पूजन के लिए कांवड़ में गंगाजल भरकर महादेव की पूजा-अर्चना की थी। जिसके बाद से कांवड़ यात्रा की परंपरा की शुरुआत हुई। तभी से देशभर में श्रावण मास में कावड़ यात्रा का प्रचलन शुरू हो गया। ऐसा भी कहा जाता है क् भगवान परशुराम श्रावण मास के प्रत्येक सोमवार को कांवड़ में जल ले जाकर शिव की पूजा-अर्चना करते थे। श्रावण मास के सोमवार को भगवान शिव का पूजन बेलपत्र, भांग, धतूरे, और लाल कनेर के फूलों से करने का प्रावधान है। इसके अलावा पांच चीज़े दूध, दही, शहद, घी और शर्करा मिले पंचामृत से भी भगवान शिव की पूजा की जाती है| भगवान शिव सिर्फ जल चढ़ाने से भी शीघ्र प्रसन्न हो जाते है इस लिए भगवाव शंकर को अशुतोष नाम से भी पुकारा जाता है। ऐसे महान देव आदि देव, देवों के देव शिव शम्भू को हम प्रणाम करते हैं।