क्या आप जानतें हैं रुदाक्ष के ये महत्व


रुद्राक्ष या इसकी भस्म को धारण करके 'नमः शिवाय' मंत्र का जप करने वाला मनुष्य शिव रूप हो जाता है। जहां रुद्राक्ष की नियमित पूजा होती है वहां सदैव लक्ष्मी का वास होता है..

क्या आप जानतें हैं रुदाक्ष के ये महत्व


 

क्या आप रुदाक्ष की महिमा के बारें में जानते हैं, नहीं तो हम आपको बताते हैं। रूद्राक्ष भगवान शिव बेहद प्रिय है रुदाक्ष को भगवान शिव की आंख कहा जाता है। रुद्राक्ष दो शब्दों के मेल से बना है पहला रूद्र और अक्ष जिसमें रुद्र का अर्थ है भगवान शिव और अक्ष का अर्थ है आंसू। माना जाता है की रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के आंसुओं से हुई है। इतना ही नहीं रूद्राक्ष की जड़ से लेकर फल तक सभी का अलग-अलग तरीके से प्रयोग करके कई रोगों को दूर किया जा सकता है। रुद्राक्ष को घारण करने मात्र से ही व्यक्ति में भगवत भक्ति का वास होता है। एक मुखी से लेकर एक्कीस मुखी तक रूद्राक्ष होतें हैं। जिनमें अलौकिक शक्ति और क्षमता होती है। रूद्राक्ष की महिमा का वर्णन शिवपुराण, रूद्रपुराण, सकन्द्पुराण, लिंगपुराण, श्रीमद्भागवत गीता में पूर्ण रूप से मिलता है। रुद्राक्ष या इसकी भस्म को धारण करके 'नमः शिवाय' मंत्र का जप करने वाला मनुष्य शिव रूप हो जाता है। जहां रुद्राक्ष की नियमित पूजा होती है वहां सदैव लक्ष्मी का वास होता है।

आइए हम बताते हैं कितने मुखी रुद्राक्ष धारण करने से क्या लाभ होता है-

 

1 एकमुखी रुद्राक्ष- ऐसा रुद्राक्ष जिसमें एक ही आँख हो, वह स्वयं शिव का स्वरूप है जिसे धारण करने से सभी प्रकार के सुख, मोक्ष और उन्नति प्राप्ति होती है। लक्ष्मी का घर में वास होता है और सभी उपद्रवों का नाश होता है।

2 दोमुखी रुद्राक्ष- श्री गौरी-शंकर का प्रतीक है। ऐसा रुद्राक्ष सभी प्रकार की कामनाओं को पूरा करने वाला होता हैं। ऐसे रुद्राक्ष को धारण करने से दांपत्य जीवन में सुख व शांति बनी रहती है और व्यक्ति को एक अद्भुत तेज प्रदान करता है।

3 तीनमुखी रुद्राक्ष-  अग्नि का प्रतिरूप है। जिसे धारण करने से व्यक्ति की साधनाएं पूर्ण होती हैं। व्यक्ति को समस्त भोग व ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।

4 चारमुखी रुद्राक्ष- साक्षात ब्रम्हा का स्वरूप है। जिसके दर्शन और स्पर्श मात्र से ही व्यक्ति का कल्याण होता है जो धर्म, अर्थ काम व मोक्ष को प्रदान करने वाला होता है।

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