माता लक्ष्मी को क्यूं बांधनी पड़ी राजा बलि को राखी..?


कैसे शुरू हुआ ये रक्षाबंधन का त्यौहार इसके पीछे है माता लक्ष्मी की एक दिलचस्प कहानी..

माता लक्ष्मी को क्यूं बांधनी पड़ी राजा बलि को राखी..?


 

हिन्दू पौराणिक कथाओं के अनुसार हजारों साल पहले राखी बांधने का प्रचलन शुरू हुआ था। सबसे पहली राजा बलि को माता लक्ष्मी ने रक्षासूत्र बांधकर अपना भाई बनाया था। ऐसा कहा जाता है कि राजा बलि ने जब 100 यज्ञ पूर्ण कर स्वर्ग का राज्य छीनने का प्रयास किया जिससे डरकर देवराज इंद्र ने भगवान विष्णु से प्रार्थना की। भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर राजा बलि से भिक्षा में तीन पग जमीन मांगी और भगवान ने दो पग में ही पूरी धरती नाप डाली। फिर तीसरे पग जमीन के लिए राजा बलि से कहा तो राजा बलि समझ गया कि यह कोई साधारण मनुष्य नहीं है। तीसरे पग के रूप में राजा बलि ने उनके आगे अपना सिर झुका दिया। भगवान विष्णु राजा बलि की भक्ती से प्रसन्न हो गए और वरदान मांगने को कहा। राजा बलि ने भगवान उसके पहरेदार के रूप में मांग लिया। भगवान विष्णु जब काफी समय तक स्वर्गलोक वापस नहीं पहुंचे तब माता लक्ष्मी ने राजा बलि को रक्षासूत्र बांधकर अपना भाई बना लिया और राजा बलि से उपहार स्वरूप अपने पति भगवान विष्णु को मांग लिया। उस दिन श्रावण मास की पूर्णिमा थी तभी से ये प्रथा चली आ रही है। बहनें अपने भाई को राखी बांधती हैं और इसके बदले भाई से उपहार लेती हैं।